☰  MENU
HIGHLIGHTS
तृतीय एवं पंचम सेमेस्टर में प्रवेश संबंधी आवश्यक सूचना NEW     विषम सेमेस्टर परीक्षा एवं प्रवेश पत्र वितरण सूचना NEW     कार्तिक पूर्णिमा एवं ददरी मेला अवकाश सूचना NEW     छठ महापर्व अवकाश सूचना NEW     छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं NEW     दीपावली एवं छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं NEW     दीपावली, गोवर्धन पूजा एवं भैया दूज अवकाश सूचना NEW     छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति आवेदन जांच समिति NEW     दशहरा अवकाश सूचना NEW     दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं NEW    

रोवर्स / रेंजर्स (Rangers and Rovers)


आधुनिक स्काउट गाइड आन्दोलन के जन्मदाता लार्ड बेडेन पावेल जो अंग्रेजी सेना के अधिकारी थे। उन्होंने बाल्यकाल से लेकर फौज के विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए विश्व के अनेक देशों में अपनी फौज के साथ रहकर युद्धों में भाग लेकर जो कुछ भी देखा एवं अनुभव किया, उसी से प्रेरित होकर स्काउटिंग का शुभारम्भ किया। स्काउट गाइड के शिक्षण अधिगम द्वारा छात्र/छात्राओं को अनुशासित बनाने के साथ-साथ समाज एवं देश की सेवा तथा राष्ट्र की आकस्मिक घटनाओं में सहयोग की भावना सहज रूप से विकसित हो जाते हैं। इसमें व्यावहारिक दक्षता के ऐसे अनेक कौशलों को विकसित करने के अवसर दिये जाते हैं, जिन्हें सीख कर छात्र न केवल अपने लिए वरन् दूसरों के लिए भी उपयोगी बन सकेंगे। इसके साथ ही हाइकिंग व शिविर जीवन आदि कौशलों के माध्यम से छात्रों के जीवन को उज्ज्वल एवं उदात्त बनाया जा सकता है। भारत में सन् 1909 ई0 में स्काउटिंग और सन् 1911ई० में गर्ल गाइडिंग आरम्भ हुई बंगलौर में पहला स्काउट और पहली गाइड कम्पनी खुली जिसका सीधा सम्पर्क लंदन से था, परन्तु ये संस्थाएं विदेशी बच्चों के लिए थीं। श्रीमती एनी बेसेन्ट ने भारतीय बच्चों को भी स्काउटिंग में प्रवेश देने के लिए दिल्ली लेजिस्लेटिव एसेम्बली में जोरदार भाषण दिया। पं0 मदन मोहन मालवीय और डॉ० हृदय नाथ कुंजरू ने भी इसके लिए प्रयास किया, परन्तु अंग्रेजी सरकार पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। बहुत प्रयास के बाद भी जब भारतीय बच्चों को स्काउटिंग में स्थान नहीं दिया गया तो भारत को अपनी आध्यात्मिक जन्मभूमि मानने वाली एनी बेसेन्ट ने स्वतंत्र रूप से भारतीय बच्चों के लिए भारत में स्काउट संस्था खोली। 01 अक्टूबर, सन् 1916 ई० को अडयार (मद्रास) के विशाल बरगद वृक्ष के नीचे विधिवत् प्रथम भारतीय स्काउट रैली हुई जिसको इण्डियन ब्वॉयज स्काउट एसोसियेशन नाम दिया गया। यही भारतीयों के लिए प्रथम स्काउट संस्था थी। सन् 1918 ई० में इसी संस्था ने प्रथम स्काउट मास्टर शिविर कोदाई कनात (मदुरई) में आयोजित किया। सन् 1918ई0 में ही श्रीराम बाजपेयी इलाहाबाद के कुम्भ मेले में अपने 100 स्वयंसेवकों को लेकर आये और उन्होंने प्रयाग सेवा समिति के साथ मिलकर काम किया। उनसे प्रभावित होकर मालवीय जी ने उन्हें इलाहाबाद बुलाया और 01 दिसम्बर, सन् 1918 ई० को अखिल भारतीय सेवा समिति ब्वॉय स्काउट एसोसियेशन की स्थापना की। इस संस्था में स्काउट व गाइड दोनों थे। इस संस्था द्वारा स्काउटिंग को भारतीय वातावरण एवं रहन-सहन का रूप दिया गया। हिन्दी और उर्दू में स्काउटिंग सम्बन्धी पुस्तकें प्रकाशित की गयी। इस प्रकार इलाहाबाद राष्ट्रीय स्तर पर स्काउटिंग व गाइडिंग का केन्द्र बन गया। पं0 मदन मोहन मालवीय की सेवा समिति ब्वॉय स्काउट संस्था तथा श्रीमती एनी बेसेन्ट की इण्डियन ब्वॉय स्काउट संस्था के अतिरिक्त ए०जे० लैग्लेमून की द सिन्ध ब्वॉय स्काउट एसोसियेशन डॉ० एस०के० मलिक की द बंगाली ब्वॉय स्काउट लीग, द ब्वॉय ऑफ बंगाल, मुम्बई में श्री डी०ई० महावस द पारसी स्काउटिंग सोसायटी तथा द ब्वॉय स्काउट ऑफ आगरा एण्ड अवध की स्थापना हुई। इन भारतीय संस्थाओं को एक करने के लिए कई प्रयत्न हुए। अन्त में सन् 1947 ई0 में आजादी मिलने के बाद एक राष्ट्रीय संस्था बनाने की कार्यवाही की गयी। 07 नवम्बर सन् 1950 ई० को भारतीय राष्ट्रीय स्काउट संस्था का नव निर्माण हुआ, जिसका नाम भारत स्काउट और गाइड रखा गया। इसका राष्ट्रीय मुख्यालय नई दिल्ली में है। अब पूरे देश की एकमात्र संस्था भारत स्काउट और गाइड है। प्रत्येक राज्य में राज्य स्तर पर संगठित स्काउट संस्थायें इसी राष्ट्रीय संस्था से सम्बद्ध है। इसका राष्ट्रीय प्रशिक्षण केन्द्र पंचमढ़ी (मध्य प्रदेश) में है। प्राथमिक शिक्षा स्तर के स्काउटिंग में भाग लेने वाले बालक व बालिका प्रतिभागियों को क्रमशः कब और बुलबुल, उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा (इण्टरमीडिएट) स्तर तक के प्रतिभागियों को स्काउट एवं गाइड तथा उच्च शिक्षा (महाविद्यालयीय/विश्वविद्यालयीय) स्तर पर इन प्रतिभागियों को रोवर एवं रेंजर नाम दिया गया। स्काउट गाइड का सिद्धान्त है- तैयार रहो। इसका तात्पर्य है स्काउट/गाइड अपने किसी भी कर्तव्य को पूरा करने के लिए शारीरिक मानसिक और चारित्रिक रूप से सदा तैयार रहते हैं। संस्कारों का हमारे जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। संस्कार जीवन को परिष्कृत व मर्यादित करते हैं। जिस प्रकार वैदिक संस्कृति में संस्कार के बाद ही बालक वेदारम्भ कर सकता है, ठीक उसी प्रकार स्काउट/गाइड शिक्षा का अधिकार भी स्काउट/गाइड को दीक्षा संस्कार के बाद दिया जाता है। दीक्षा संस्कार एक प्रकार से सदस्यता ग्रहण समारोह होता है।

महाविद्यालय में रोवर्स रेंजर्स प्रत्येक का एक-एक प्रभारियों द्वारा दल के प्रतिभागियों को स्काउट/गाइड योजना दल शैक्षिक सत्र 1994-95 से ही गठित है। सम्बन्धित महाविद्यालय का रोवर्स/रेंजर्स दल जनपदीय रोवर्स रेंजर्स के लक्ष्यों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाता है। प्रतिवर्ष समागम में सम्मिलित होता रहा है। विविध प्रतियोगिताओं में प्रथम/द्वितीय स्थान अर्जित करते हुए गुणांक के आधार पर इसने विजेता उपविजेता का श्रेय भी प्राप्त किया है तथा विश्वविद्यालयीय समागम में अपना प्रतिभाग सुनिश्चित करते हुए एकल प्रतियोगिताओं में प्रथम व द्वितीय स्थान अर्जित कर राज्य स्तरीय समागम में भी प्रतिभाग करने का श्रेय प्राप्त कर महाविद्यालय को गौरवान्वित किया है।